हे दुःख भंजन, मारुती नंदन - The Indic Lyrics Database

हे दुःख भंजन, मारुती नंदन

गीतकार - पारंपरिक | गायक - अनेकानेक | संगीत - अनेकानेक | फ़िल्म - लागू नहीं | वर्ष - 1920

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हे दुःख भंजन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

अष्ट सिद्धि, नव निधि के दाता,
दुखिओं के तुम भाग्यविधाता ।
सियाराम के काज संवारे,
मेरा करो उद्धार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ।

हे दुःख भंजन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी,
तुम पर रीझें अवधबिहारी ।
भक्तिभाव से ध्याऊं तोहे,
कर दुखों से पार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ।

हे दुःख भंजन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

जपूँ निरंतर नाम तिहारा,
अब नहीं छोड़ूँ तेरा द्वारा ।
रामभक्त मोहे शरण मे लीजे,
भाव सागर से तार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ।

हे दुःख भंजन, मारुती नंदन, 
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

हे दुःख भंजन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥