मेरे रश्क़ -ए-क़मर - The Indic Lyrics Database

मेरे रश्क़ -ए-क़मर

गीतकार - फ़ना बुलंदशहरी | गायक - नुसरत फतेह अली खान | संगीत - Nil | फ़िल्म - Nil | वर्ष - Nil

View in Roman

मेरे रश्क़ -ए-क़मर तू ने पहली नज़र
जब नज़र से मिलाई मजा आ गया
बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई
आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया
जाम में घोल कर हुस्न की मस्तियाँ
चाँदनी मुस्कुराई मज़ा आ गया
चाँद के साए में ऐ मेरे साक़िया
तू ने ऐसी पिलाई मज़ा आ गया
नशा शीशे में अंगड़ाई लेने लगा
बज़्म-ए-रिंदाँ में साग़र खनकने लगे
मयकदे पे बरसने लगीं मस्तियाँ
जब घटा घिर के छाई मज़ा आ गया
बे-हिजाबाना वो सामने आ गए
और जवानी जवानी से टकरा गई
आँख उन की लड़ी यूँ मेरी आँख से
देख कर ये लड़ाई मज़ा आ गया
आँख में थी हया हर मुलाक़ात पर
सुर्ख़ आरिज़ हुए वस्ल की बात पर
उसने शरमाके मेरे सवालात पे
ऐसे गर्दन झुकाई मज़ा आ गया
शेख़ साहब का ईमान बिक ही गया
देख कर हुस्न-ए-साक़ी पिघल ही गया
आज से पहले ये कितने मग़रूर थे
लुट गई पारसाई मज़ा आ गया
ऐ फ़ना शुक्र है आज बाद-ए-फ़ना
उसने रख ली मेरे प्यार की आबरू
अपने हाथों से उसने मेरी क़ब्र पे
चादर-ए-गुल चढ़ाई मज़ा आ गया