दिल धड़कने की आवाज़ की कामोशी के शिवा - The Indic Lyrics Database

दिल धड़कने की आवाज़ की कामोशी के शिवा

गीतकार - शहरयार, महादेवी वर्मा, माया गोविंद | गायक - भूपिंदर, पीनाज़ मसानी | संगीत - जयदेव | फ़िल्म - त्रिकोण का चौथा कोन | वर्ष - 1983

View in Roman

भु: दिल धड़कने की आवाज़ की ख़ामोशी के सिवा
कोई भी तो नहीं
पी: बेसबब हम को भी तीसरे का गुमाँ कैसे बज़्म हुआ
भु: कोई भी तो नहींभु: तेरी ज़ुल्फ़ों ...
पी: aalaap
भु: (तेरी ज़ुल्फ़ों की ख़ुशबू में भीगी हुई मेरी ये उँगलियाँ
ढूँढती हैं तुझे ) -२
छू रही हैं तुझे
आ न जाएँ कहीं आज पैरों तले
पी: आ न जाएँ कहीं आज पैरों तले
भु: अपनी परछाइयाँ, धीरे-धीरे चलो
पी: धीरे-धीरे चलो
भु: मुँह से कुछ मत कहो
पी: धीरे-धीरे चलो, जो भी कहना है आँखों से आँखें कहेंभु: सुर्ख़ फूलों को बोसों से मदहोश करती हुई -२
शाम की ये हवा तक रही है तुझे
तेरी पेशानी को चूमने के लिये -२
तक रही है तुझे
ओस की बूँद के
पी: hmmmm
भु: ओस की बूँद के बोझ से मेरी पलकें झुकीं, तेरी साँसें रुकींपी: कोई भी तो नहीं. दिल धड़कने ...