गीतकार - शम्स लखनविक | गायक - खर्शीद | संगीत - ग़ुलाम हैदर | फ़िल्म - मंझधार / लाॅस्ट इन मिड-स्ट्रीम | वर्ष - 1947
View in Romanआपन जीवन दरपन न्यारा
आपन जीवन दरपन न्यारा
इसमें समाया रूप तिहारा
आपन जीवन दरपन न्यारा
आपन जीवन
जग की सेवा जीवनरकशा
जग की सेवा जीवनरकशा
कर्मा तुम्हारे धर्म हमारा
रोगी मन को तुम्हरी आशा
जीवनजल का तुमही से धारा
मन में समाया रूप तिहारा
आपन जीवन दरपन न्यारा
अन्धी आँख को तुम्हारा दरसन
दुखबदरी में चमकता तारा
आ हा
भक्त को भी अपना सा बना दो
हाथ हों मेरे काम तुमहारा
मन में समाया रूप तिहारा
आपन जीवन दरपन न्यारा